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होली के त्योहार रंगों की धूम के साथ गुजिया का स्वाद

होली के त्योहार रंगों की धूम के साथ गुजिया का स्वाद

होली के त्योहार रंगों की धूम के साथ गुजिया का स्वादहमारे देश में गुजिया एक पारंपरिक मिठाई है। होली के त्योहार पर इसका खास महत्व है। होली के दिनों में यह मिठाई संभवत: हर घर में बनाई जाती है। हम यहां आपको इसे बनाने की सबसे आसान विधि बता रहे हैं।

आवश्यक सामग्री

एक किलोग्राम मैदा

एक किलोग्राम बूरा

एक किलोग्राम खोयवा

300 ग्राम घी मोमन के लिए

तलने के लिए घी एक किलोग्राम

100 ग्राम पिस्ता

50 ग्राम गोला का बुरादा  

50 ग्राम चिरौंजी

50 ग्राम छोटी इलायची 

बनाने की विधि

मैदा को परात में छानकर 300 ग्राम घी गुनगुना करके ढंग से मिला लें। गुनगुने पानी से ही उसको गूंथ लें। गूंथा हुआ मैदा न सख्त हो, न ढीला। एक घंटा के लिए उसे ढककर रख दें।

अब खोवे को थोड़ा भूनकर कड़ाही में से एक परात में रख लें। थोड़े से घी में एक कटोरी आटा बादामी होने तक भून लें। आटे को भूनते समय कड़ी जैसा पतला हो जाए। ठंडा होने पर खोवा, भुना हुआ आटा, बूरा, सभी मेवा, पिसी हुई इलायची, गोला का बुरादा, चिरौंजी आदि डालकर उसकी पंजीरी जैसी बनाकर रख लें।

अब छोटी लोइयां बनाकर उसकी पूड़ी बना लें। पूड़ी बेलते समय उसमें सिलवटें नही पड़नी चाहिए। पूड़ी को पलटकर उल्टे हाथ की हथेली पर रखकर चम्मच से उसमें भरावन भरकर पूड़ी के किनारे पर पानी और थोड़ी सी मैदा मिलाकर बनाया पेस्ट से पूड़ी को मोड़कर चिपका दें। उंगलियों से किनारे अच्छी तरह दवा दें। उसके किनारे गोंठ दें या मशीन से काट लें। एक परात पर चादर बिछाकर पंक्ति में गुजिया लगाते जाइए। कपड़े से ढक दें।

इसके बाद, कड़ाही में घी गर्म करें। उसमें गुजिया डालकर हल्का बादामी रंग होने तक तलते जाएं। गुजिया सेंकते समय सावधानी से उलटनी और पलटनी है। एक भी गुजिया खुल जाए तो सारा घी खराब हो जाता है। इसलिए, खुली हुई गुजिया को उसी समय सीधी रखो। इससे भरावन पिघलकर चारों तरफ न फैल जाए।

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